बच्चों की इम्युनिटी कैसे बढ़ाये इन हिंदी।Bacho ki immunity kaise badhaye in hindi.

bacho ki immunity kaise badhaye in hindi
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बच्चों के इम्यूनिटी सिस्टम में सुधार के टिप्स। bachchon ke immunity system mein sudhaar ke tips.

बच्चों के इम्यूनिटी सिस्टम में सुधार करने के लिए कुछ जानकारी साझा कर रहे हैं। इम्यूनिटी का मतलब रोग प्रतिरोधक छमता जो शरीर के अंदर सुपर आर्मी की तरह लड़ने को तैयार खड़ा रहता हैं।

उसे ही रोग प्रतिरोधक छमता वाले सुपर आर्मी कहते हैं। लड़ने की क्षमता या कहे रोकने की क्षमता से इम्यूनिटी का अर्थ निकलकर आता हैं। इम्युनिटी का मतलब युक्तियाँ प्रतिरक्षा सिस्टम को मजबूत करना हैं।

बच्चों में इम्यूनिटी कैसे बढ़ाये  जाये यह प्रश्न हैं?। bacho ki immunity kaise badhaye in hindi

तो इम्यूनिटी लेबल बढ़ाने के लिए ठोस आहार या इम्यूनिटी बढ़ाने वाले फ्रूट लेना चाहिए। यह रोग प्रतिरोधक छमता को ताकतवर बनाने के लिए सबसे कारगर तरीका हैं।

यदि इम्यूनिटी लेबल ज्यादा खराब लगता हैं तो बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा भी ले सकते हैं।

आयुर्वेदिक दवा  से किसी हद तक किसी इन्फेक्सन, किसी भी वायरस से बचाया जा सकता हैं।

जब बेबी माँ के गर्भ में रहती हैं तो माँ बच्चों के केयर उनके इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करने के लिए अनेक प्रतिरोधक छ्मता वाले फल फ्रूड्स या दवाई लेती हैं।

जिससे गर्भ में रहते बच्चे की इम्युनिटी मजबूत बना रहता हैं और गर्भ से बाहर धरती में आने के कुछ दिन बाद उनके इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होने लगता हैं।

इस कारण से बच्चे बीमार होने लगते हैं। बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय के लिए हमेशा जरुरी कदम उठाते रहना चाहिए।

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बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं वयस्कों की प्रतिरक्षा प्रणाली से तुलना। Bachchon kee rog pratirodhak kshamata evan vayaskon kee pratiraksha pranaalee se tulana.  

Rog pratirodhak kshamata

एक बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली एक वयस्क की तरह मज़बूत नहीं होती है। शिशुओं का जन्म एक अपरिपक्व प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ होता है।

जैसे-जैसे वे बढ़ते हैं, तो उनकी प्रतिरक्षा का स्तर बढ़ता है और प्रारंभिक किशोरावस्था में परिपक्वता तक पहुँच जाता है।

जीवन के पहले दिनों और महीनों में, प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं और संक्रमण से लड़ने वाले अणुओं को एंटीबॉडी कहा जाता है जो माँ से बच्चे को स्तन के दूध के माध्यम से मिलता है। 

यह शिशु को यथासंभव स्वस्थ रखने का प्रकृति का तरीक़ा है और कई महत्त्वपूर्ण कारणों में से एक है कि यदि संभव हो तो बच्चे को स्तनपान ज़रूर व अवश्य करना चाहिए।                                                                                                             

जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे अधिक से अधिक बाहर के वातावरण के संपर्क में आते जाते हैं। जिससे कि उन्हे ठंड गर्मी और बहुत सारे अवरुद्ध नाक, या यहाँ तक कि बुखार के साथ बीमार देखने को मिलता है।                                                               

इससे डरने की बात नहीं हैं बल्कि उनके प्रतिरक्षा प्रणाली को ठीक करने के लिए प्रकृति तरीक़ा का इस्तमाल करना चाहिए जैसे कि आयुर्वेदिक संरचनाएँ को देख सकते हैं।                                                                                                                     

जब बच्चे नर्सरी या स्कूल के पहले वर्षों में होते हैं, तो वे अभी भी सर्दी, वायरस और अन्य संक्रामक बीमारियों के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं।

यही कारण है कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों से भरा एक कमरा संक्रमण के लिए एकदम सही प्रजनन स्थल है।  

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1.माँ के दूध में विटामिन। Maan ke doodh mein vitamin.

माँ के दूध उतना ज़रूरी हैं जितना वह बच्चा पचा सके। माँ के दूध से भरपूर मात्र में उसे प्रोटीन, बीटामिन और अन्य जीतने भी पोषक तत्व है वह मिलता हैं। माँ के दूध बच्चे के लिए सर्वोपरि हैं।

2.मां के दूध में कौन कौन से तत्व होते हैं। maan ke doodh mein kaun kaun se tatv hote hain.

माँ के दूध में विटामिन ए एवं एंटीबॉडीज युक्त कोलोस्ट्रम रहता हैं जो कि किसी भी तरह के वायरस को लड़ने में मदद करता है जिसे बच्चे को इन्फेक्सन कम होता हैं।

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3.बच्चे को माँ का दूध कब तक पिलाना चाहिए। bachche ko maan ka doodh kab tak pilaana chaahie.

बच्चे को 6 महीने तक या उससे अधिक तक पिलाना चाहिए। माँ के दूध बच्चे के लिए अमृत के समान होता हैं। 6 महीने के बाद बेबी को फूड सप्लिमेंट देने के प्रोडक्ट रिसर्च करे।
सेरेलक कैसे पिलाये, सेरेलक के फायदे के बारे में देख सकते हैं। माँ के दूध को हर हाल में सेवन करना चाहिए। उनके बाद कोई पूरक फूड सप्लिमेंट की ओर देखना चाहिए।
सेरेलक कैसे पिलाये पोस्ट में सेरेलक के बारे में डिटेल दिया हुआ हैं। उनके देखे और विस्तार पूर्वक जानकारी हासिल करे। 
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4.शिशु के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम आहार क्यों है। shishu ke lie maan ka doodh sarvottam aahaar kya hain.

माँ के दूध में पर्याप्त लोहा और खनिज तत्व विटामिन ए एवं एंटीबॉडीज युक्त कोलोस्ट्रम होने के साथ-साथ चायपचाय के लिए पर्याप्त मात्र में तत्व होते हैं।

माँ का दूध शिशु के लिये अमृत समान होता है। इस कारण शिशु के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम आहार है। नवजात शिशुओं की ज़रूरतों के लिए अनुकूल रूप से विकास में मदद करता है।

प्रतिरोधक क्षमता-माँ के दूध में उच्च प्रोटीन और रोगप्रतिकारक मौजूद होते हैं जो शिशु की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता हैं।

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 5.दही खाने के फायदे। dahee khaane ke fayde.

दही अक्सर हर घर में पाया जाता हैं। दूध को दही में बदलने वाला एंजाइम होने के कारण दही खट्टा होने लगता हैं।

उनके बावजूद दही में विभिन्न प्रकार के पौस्टिक तत्व पाये जाते हैं। दही से बना प्रोटीन होने के चलते उनके खाने से शरीर को बहुत फायदा होता हैं।

दूध से बना दही में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन, लैक्टोज़, आयरन फास्फोरस मिलता हैं। जो कि शरीर के लिए बहुत फ़ायदे मंद होता हैं। दही में प्रोबायोटिक्स नामक सहायक दही के जीवाणु रहता हैं।

जो आपके शरीर के भोज्य पदार्थ को पाचन के लिए सहायक का काम करता हैं और शरीर को बीमार होने से लड़ने में मदद करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। 

दही में बैक्टीरिया फायदे मंद हैं। दही का सेवन करने में प्रतिरोधक क्षमता का विकाश होता हैं। दही के सेवन करने से भी इम्यूनिटी सिस्टम पवार बढ़ती हैं।

इनके साथ ही पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मददगार साबित होता हैं।

6.फल एवं मौसमी सब्जियाँ। phal avam mausamee sabjiyaan.

फलों और सब्जियों के महत्व हमारे जीवन पर बहुत हैं। इनमें एन्टीआंक्सीडेंट, विटामिन सभी मौसमी फल व सब्जियाँ में प्रचुर मात्र में रहता हैं। अनेक सब्जियों के औषधीय गुण जैसे छमता वाले होते हैं।

ज्यादतर विटमिन ए व-सी से भरे होते हैं। जो बच्चे के इम्यूनिटी सिस्टम को बूस्टर करने में मदद करता हैं प्रतिदिन अच्छे फल खाना चाहिए, जिससे पूर्ण मात्र में विटामिन, प्रोटीन मिल सके।

फल जो इम्यूनिटी सिस्टम को बूस्ट करता हैं हर हाल में खाने की कोशिश करना चाहिए।

मौसमी फल जैसे- अमरूद, पपीता, जामुन, संतरा व सब्जी में कद्दू, प्याज हरे पत्ते वाली सब्जियाँ के साथ फलों का महत्व हैं।

राजमा, छोले, सोयाबीन, गेहु,अनाज,भी शाकाहार में आता हैं। इसमें भी प्रचुर मात्र में प्रोटीन मिलता हैं।

7.दैनिक सूखे मेवे खाने का लाभ। dainik sookhe meve khaane ka laabh.

मेवा में ज़रूरी विटामिन व खनिज का प्रचुर मात्र होता हैं। ताजे फलों में पौष्टिक होते हैं परंतु मेवे में फलों से अपेक्षा अधिक पौष्टिक होते हैं। मेवे में कई प्रकार की बीमारियों से रक्षा करने की उससे लड़ने की शक्ति होती हैं। 

मेवों में शरीर से बुरे या बैड कोरोस्ट्रल को कम करने की क्षमता होती हैं। इसमें बादाम, अंजीर, काजू, अखरोट, का भी मिश्रण रहता हैं। अखरोट व बादाम में ओमेगा-3 फैटी एसिड़ रहता हैं। 

जो कि शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को शक्ति देते हुये बीमारी से लड़ने में मदद करता हैं। ओमेगा-3s बच्चों के लिए श्वसन में संक्रमण होने नहीं देता।

8.अखरोट के फायदे इन हिन्दी।akhrot benefits in hindi.

अखरोट का सेवन को बहुत अच्छा माना जाता हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड़ होने के कारण इंटरनल सिस्टम को काफी हद तक बहुत फायदेमंद पहुचता हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड़ होने के कारण अतिरिक्त प्रचुर मात्र में प्रोटीन पाया जाता हैं। 

इसके सेवन से भूख ना के बराबर लगता हैं और अतिरिक्त कैलोरी के सेवन करने से बच जाते हैं।

अखरोट के सेवन से एन्टीआक्सीडेंट तत्व शरीर के इम्युनिटी सिस्टम को ताकतवर बनाते हुये अनेक बीमारियों से रक्षा करने में मदद करता हैं। 

पाचन तंत्र को मजबूत बनाता हैं। इसमे मौजूद फाइबर आपके बाउल सिस्टम को बेहतर बनाता हैं और कब्ज व पाचन सम्बंधी बीमारी को दूर भागता हैं और ओमेगा-3s होने के कारण बच्चों के लिए श्वसन में संक्रमण होने नहीं देता।

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9.कच्चा लहसुन खाने के फायदे।benefits of eating raw garlic in hindi.

रोग प्रतिरोधक क्षमता के गुण कच्चा लहसुन में रहता हैं। कच्चा लहसुन खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। साथ ही इसमें प्रायप्त मात्र में एलिसिन जिंक सल्फर और विटामिन ए व ई पाये जाते हैं।

कच्चा लहसुन के सेवन से ब्लाड ग्लूंकोज लेवल सम्बंधी समस्या दूर होता है। इससे शुगर लेवल नियंत्रित में करने की क्षमता रहता हैं और डायबिटीज के ख़तरा लेवल को कम करता हैं।

कच्चेु लहसुन के साथ पानी पीने से टीबी बीमारी को रोक थाम में हेल्प करता है। अगर टीबी की बीमारी के लक्षण हैं तो कच्चा लहसुन खाने की आदत में डालें। कच्चा लहसुन बहुत हेल्प करेगा।

10.ओट्स के फायदे। benefits of oats in hindi.  

ओट्स में पर्याप्त मात्र में फाइवर्स पाये जाते हैं। साथ ही इसमें एन्टी–माइक्रोबियल गुण भी होता हैं।  हर रोज़ ओटस का सेवन करने से इम्यूनिटी सिस्टम मज़बूत करता हैं।

ओट्स के फायदे के रूप में कब्ज समस्या वाले व्यक्ति को होता हैं। माना जाता हैं कि ओट्स में चायपचाय के क्षमता सबसे अच्छा होता हैं।

ओट्स में कैल्शियम, पोटेशियम, विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स और मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में होता है।

इसलिए ओट्स नर्वस सिस्टम को दुरुस्त बनाए रखने में हेल्प करता है।

11.ग्रीन टी व ब्लैक टी। Green Tea and Black Tea। (शरीर में तत्काल एनर्जी)

दोनों ही इम्यूनिटी सिस्टम के लिए फायदेमंद होती हैं। ग्रीन टी व ब्लैक टी के पीने से शरीर में तत्काल एनर्जी मिलता हैं। लेकिन एक दिन में इनके एक से दो कफ ही पीना चाहिए। ज़्यादा मात्र में सेवन करने से नुकसान हो सकता हैं।

12.विटामिन – डी.Vitamin D। ( हड्डियों को मजबूत)

हमारे लिए महत्त्वपूर्ण होता हैं। इससे कई रोगों से लड़ने की ताकत मिलती हैं। साथ ही हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए और दिल सम्बंधी बीमारियों को दूर रखने के लिए भी विटामिन डी लेना बहुत ज़रूरी हैं।

 

13.विटामिन – सी.Vitamin C। (संक्रामक रोगों से सुरक्षा)

विटामिन – सी का सेवन करना संक्रामक रोगों से सुरक्षा के लिए बहुत फायदेमंद होता हैं। नीबू और आंवले में प्रायप्त मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता हैं। जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता हैं।

इन्हे भी पढ़ें – हॉर्लिक्स पीने के फायदे। 

14.क्वेश्चन एवं आंसर। Question and Answer.

Question – रोगप्रतिकारक शक्ति कैसे बढ़ाये?

Answer – इस पोस्ट में आयुर्वेद से रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाने के उपाय दिया हुआ है।

Question – इम्यून सिस्टम क्या होता है?

Answer – इम्यून या इम्यूनिटी सिस्टम हमारे शरीर के अंदर रक्षक के रूप में सुपर आर्मी हैं। हमारे शरीर के सुपर हीरोज

हैं। इस पोस्ट को देखने के लिए यहाँ क्लिक करे।

Question – बच्चों की इम्युनिटी पावर कैसे बढ़ाएं?

Answer – इम्यूनिटी कैसे बढ़ाये इसके बारे इस पोस्ट में लिखा गया हैं।

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